
मानपुर-मोहला क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मदनवाड़ा की सड़कें वर्तमान में बदहाल स्थिति में हैं। हाल ही में पत्रिका खबर की टीम ने बस्तर भ्रमण के दौरान इस सड़क का स्थलीय निरीक्षण किया, जहां यह साफ नजर आया कि सड़क की हालत न केवल खराब है, बल्कि यह जनता के लिए जानलेवा भी बन चुकी है।

27 जून 2025 को सुबह 9 बजे के आसपास जब पत्रिका खबर के छत्तीसगढ़ सह-संपादक शिव शंकर सिंह गौर टीम के साथ वहां पहुंचे, तो सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, उनमें भरा बरसाती पानी और उखड़ चुकी डामर की परतें देखी गईं। स्थिति यह थी कि यह समझना मुश्किल हो गया कि सड़क में गड्ढे हैं या फिर गड्ढों के बीच में कुछ सड़क बची है।

स्थानीय लोगों से बातचीत में सामने आया कि पिछले कई वर्षों से सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। लोग बाइक से फिसल कर गिरते हैं, एम्बुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं बाधित होती हैं, और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
एक ग्रामीण ने कहा, “हमने कई बार जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला, काम कुछ नहीं हुआ। अब हम चुनावों में जवाब देंगे।”

सवाल यह उठता है कि जब सरकारें ‘विकास’ के बड़े-बड़े दावे करती हैं, तो फिर आदिवासी बहुल क्षेत्रों की ऐसी बुनियादी समस्याएं क्यों अनदेखी की जाती हैं? क्या इन क्षेत्रों की जनता को भी मूलभूत सुविधाएं पाने का हक नहीं है?

पत्रिका खबर की टीम ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया है ताकि जिम्मेदार विभाग, जनप्रतिनिधि और शासन-प्रशासन इस ओर ध्यान दें। आखिरकार, जनता की आवाज ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क कब बनेगी, बल्कि यह भी है कि इसके जिम्मेदार कौन हैं?
सरकारें आती जाती रहेंगी, लेकिन अगर बुनियादी ढांचे पर ध्यान नहीं दिया गया तो “गड्ढों में सड़क” जैसी स्थिति आम हो जाएगी।
जनता जानना चाहती है – क्या इस बदहाली का जवाब मिलेगा? या फिर यह इलाका यूं ही उपेक्षित रह जाएगा?
