प्रशासन की अनदेखी से परेशान किसान, राजस्व विभाग पर उठे सवाल
बालोद, छत्तीसगढ़ | 20 जून 2025:
जिले के सैकड़ों किसान इन दिनों ऑटो म्यूटेशन प्रक्रिया के बाद भी अपने नाम से भू-स्वामी अधिकार पत्र (ऋण पुस्तिका) नहीं मिलने से बेहद परेशान हैं। खेतों में बोनी का समय नजदीक है, लेकिन परचे के अभाव में किसानों को सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों में भारी आक्रोश है।
राजस्व विभाग द्वारा रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भले ही ऑनलाइन कर दी गई हो, लेकिन परचा प्राप्त करने की प्रक्रिया अब भी जटिल और धीमी बनी हुई है।
राज्य सरकार द्वारा ऑटो म्यूटेशन की प्रक्रिया को इसलिए लाया गया ताकि पहले जमीन खरीदने के बाद व्यक्ति को अलग से म्यूटेशन (नामांतरण) के लिए तहसील या राजस्व कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे वह अब आसान हो। परन्तु सरकार का यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं करना कि ऑटो म्यूटेशन के बाद ऋण पुस्तिका किसके पास से मिलेगा, यह आम जनता एवं किसानों के लिए दुखदाई बन हुआ है।
अब सिर्फ ऋण पुस्तिका प्राप्त करने के ही लिए किसानों को भटकना पड़ रहा है। विभाग के अधीनस्थ एक अधिकारी दूसरे के पास भेजता है, दूसरा फिर पहले के पास भेजता है।
बालोद जिले के बालोद, डौंडी लोहारा, गुण्डरदेही में पंजीयन कार्यालय के माध्यम से जमीन के रजिस्ट्री एवं अन्य कार्य किया जाता है। जब तक समाधान नहीं होता, तब तक किसानों को योजनाओं से वंचित रहना पड़ेगा, जिसका सीधा असर उनकी खेती और आजीविका पर पड़ेगा।
