मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. डी. गुरु की खंडपीठ ने दी बड़ी टिप्पणी

बिलासपुर, 2 सितम्बर 2025 –
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंडाल, अस्थायी ढाँचे, धरना, जुलूस और रैली जैसी गतिविधियों के कारण सड़क जाम और अव्यवस्था को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को संज्ञान में लिया है।
यह मामला नितिन सिंघवी बनाम राज्य शासन एवं अन्य जनहित याचिका (WPPIL No. 46/2025) के तहत सुनवाई में आया। कोर्ट को बताया गया कि 23 अप्रैल 2025 के आदेश के पालन में मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर किया था। इसमें कहा गया कि सभी संबंधित विभागों और विशेषज्ञों की बैठक के बाद एक नई नीति तैयार की गई है।
इस SOP का शीर्षक है –
“छत्तीसगढ़ नगरपालिका सड़कों, फुटपाथों आदि पर पंडालों / अस्थायी संरचनाओं / धरना / जुलूस / सभा / रैली के अनुमति हेतु दिशा निर्देश 2025”।
शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग ने 25 अगस्त 2025 को यह दिशा-निर्देश सभी नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका / नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को भेज दिए हैं।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यह देखा जाए कि यह नई नीति प्रभावी साबित होती है या नहीं। इसके लिए अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2025 को तय की गई है।
इसका सीधा मतलब है कि अब छत्तीसगढ़ में सड़क या फुटपाथ पर किसी भी पंडाल, रैली या धरना लगाने के लिए तयशुदा नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। तथा
